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Hindi Shayari .pdf



Original filename: Hindi Shayari.pdf
Author: A

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Hindi Shayari for boyfriend and
girlfriend to impress them and fall in
love with them.
Shayari has been a medium since a long time to express feelings for your love one.
Normally every person uses this Hindi shayari to express their inner emotions.
With that purpose we have come up with some of the best shayari that are written by
many legends like Mirza Ghalib and Ummar Khyamm. So enjoy this ultimate collection
of Hindi shayari.

Hindi shayari
आहिस्ता बोलने का तेरा अंदाज़ बिुत कमाल िै ,
कान सन
ु ते कुछ निी लेककन हदल सब समझ जाता िै !
उमर ककतनी मंजज़लें तय कर चुकी थी मगर,
हदल एक बार तेरे हदल से टकराया तो ठिरा िी रि गया!
नाम तेरा ऐसे ललख चक
ु ा िूँ अपने वजद पर,
की िम-नाम कोई तेरा लमल जाए तो भी हदल धड़क जाता िै !
इतनी तिज़ीब से पेश आना आदत िै तम्
ु िारी,
या, मझ
ु े क़त्ल करने की साजज़श िै तम्
ु िारी!
ककतने मज़बर िैं िम इस इश्कक़ के िाथों,
ना तझ
ु े पाने की औकात, ना तझ
ु े खोने का िौंसला!
उस के साथ रिते-रिते, उस की चाित सी िो गयी िै ;
उस से बात करते करते, उसकी आदत सी िो गयी िै ;
एक पल ना लमले तो बेचेनी सी लगती िै ,

दोस्ती ननभाते-ननभाते, उस से मोिब्बत सी िो गयी िै !
हदल में िमने तम्
ु िारे प्यार की दास्तान ललखी िै ,
ना थोड़ी ना तमाम ललखी िै ,
कभी िुमारे ललए भी दआ
ु कर ललया करो सनम,
िमने तो िर एक साूँस तम्
ु िारे नाम ललखी िै !
गले लमला िै वो मस्त-ए-शबाब बरसों में ,
िुआ िै हदल को सरू
ु र-ए-शराब बरसों में ,
ननगाि-ए-मस्त से उस की िुआ यि िाल मेरा,
की जैसे पी िो ककसी ने शराब बरसों में !
~ दाघ दिलवी
कोई पछ रिा िै मझ
ु से मेरी जज़ंदगी की कीमत,
मझ
ु े याद आ रिा िै तेरा िल्के से मस्
ु कुराना!
तेरे पास में बैठना भी इबादत, तझ
ु े दर से दे खना भी इबादत;
ना माला ना मंतर, ना पजा ना सजदा, तझ
ु े िर घड़ी सोचना भी इबादत!

जीने की ख्वाइश में िर रोज़ मरते िैं;
वो आए ना आए िम इंतज़
े ार करते िैं;
जठा िी सिी मेरे यार का वादा िै ;
िम सच मानकर ऐतबार करते िैं!
एक ख्वाइश लसरिाने रख दो ना;
आज मझ
ु पे तम
ु इनायत कर दो ना;
ज़रा चुपके से खामोशी से;
तम
ु इज़िार-ए-मोिब्बत कर दो ना!
जजसको चािो उसे चाित बता भी दे ना;
ककतना प्यार िै उससे यि जता भी दे ना;
यूँ ना िो की उसका हदल किीं और लग जाए;

करके इज़िार उसके हदल को चुरा भी लेना!
इश्कक़ से कभी िमने इनकार निी ककया;
पर इस हदल को कभी इतना बेकरार निी ककया;
बस आूँखों में उनके सपने सजाए रखे िैं;
मगर कभी िमने िोंठों से इश्कक़ का इज़िार निी ककया!
इज़िार मोिब्बत का कुछ ऐसे िुआ;
क्या किें की प्यार कैसे िुआ;
उनकी एक झलक पे ननसार िुए िम;
सादगी पे मर-लमटे और आूँखो से इक़रार िुआ!
आूँखों की गिराई को समझ निी सकते;
िोंठो से कुछ कि निी सकते;
कैसे बयान करे िम आपको यि हदल का िाल की;
तम
ु िी िो जजसके बबना िम रि निी सकते!
जीवन में एक बार सभी ने ककया िै प्यार;
कुछ ने डर कर कुछ ने जोश में ककया इज़िार;
मगर बबना बोले जब दो हदल कि जायें हदल की बात;
विी िै नज़र का नज़र से सच्चा इक़रार!
इश्कक़ के इज़िार में िर चाूँद रुसवाई तो िै ;
पर करूूँ क्या अब तबीयत आप पर आई तो िै !
~ अकबर अल्लिाबाडी

आप के बाद यि मिसस िुआ िै िमको;
जीना मजु श्ककल निी और मरना भी दश्कु वार निी!
~ गल
ु ज़ार
आूँख रखते िो तो उस आूँख की तिरीर परिो;
मूँि
ु से इक़रार ना करना तो िै आदत उस की!

तेरे दीदार की तलब रखता था;
तझ
ु से प्यार की चाित रखता था;
तझ
ु से इज़िार की भी सदा रखता था;
रख ना पाया तो लसर्फ़ इज़िार-ए-जन
ु न!
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Author :- I am Subhash Mod, Currently writes at Love shayari. I am a web developer and blogger. Love
to write. A married and fun loving person.


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