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2014 . July . 11

six kavita anwar suhail

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क वताएं: अनवर सुहैल मज़दरू दवस: काश ऐसा न होता रात अंधड़ म िछतराए फूस के छ पर को करना है दरु त ले कन समय कहाँ अभी तो जाना है काम पर फरसे फूल आये पेट म कुलबुला रहा है जीव अनमनी सी कराह रह घरवाली रांध नह पाती भात... भूखे पेट पैडल मारता भूरा ु टटह साइ कल खींच रहा ससुर चैन साई कल क काहे उतरती बार-बार भूरा बेबस-लाचार, ठ केदार का मुंशी भगा दे गा उसे जो दे र से पहंु चा वो... लड़ भी तो नह सकता भगा दया गया तो डू ब जायेगी तीन माह क मजूर भूरा नह जानता क आज मजदरू दवस है आज तमाम मजदरू - वरोधी ित ान म मजदरू के योगदान और बिलदान पर बोलगे अिभजा य मजदरू नेता और शोषक ध नासेठ मािलक... कैसे समझाएं... कैसे समझाएं तु ह क हम कोई झु ड नह मवेिशय के कैसे यक न दलाएं तु ह क हमारे भी कई ख़◌्् वाब ह छोट -छोट , इ ी-उ ी वा हश ह जनसे हम भूले रहते ह अपने दःख ु , अपनी िचंताएं... तुम हमारे जीवन म आते हो एक दखल क तरह और िछतरा- बखरादे ते हो हमारे रे त के घर दे .... हमारे बीच से पा िलए तुमने बचैिलए और बन बैठे बलात चरवाहा, माग-दशक, उ ारक... जाओ, हम तु हे अब पहचान गए ह और अपनी ताकत को जान गए ह... म न पालो लोग ... यह सोच कर खुश न ह क हम बहत ु सताया तुमने हमे कोई नह सता सकता हम तो स दय के सताए ह... हम तो खटारा बस के सफ़र म तलाश लेते ह एक संगीत हम रे ल के जनरल कोच म तलाश लेते ह मीत.. खुद पर नाज़ है हम असु वधाओं, अभाव म पले ह हम तभी तो फौलाद से ढले ह हम वपर त धारा म तैरने का मज़ा तुम या जानो दो त... सवाल उठते रहगे... सवाल उठते ह रहगे हम जा वये बदल कर नये तक से सजाकर दे ते रहते ह जवाब जवाब कतने भी सट क ह ले कन वे मुतमईन हो नह होते... संदेह के जंगल म सवाल के दर त फर- फर उग आते ह और हम बार-बार उ ह जवाब को दहराते थक जाते ह.... ु अब बस भी करो भाई या तो सवाल बदल दो या फर हम ब श दो.... चाहत ये नफ़रत... ये ज़ु मत... ये लानत-मलामत... ये तुहमत... इं सान इसी पूज ँ ी के बल पर बसात बछाकर िशखर-पु ष बन बैठता है .... और ऐसे क ठन समय म हम कतने बुरबक ह जी जो खोज रहे ह मुह बत..मुह बत...मुह बत.... अ न-पर ा कहते ह क एक दाना से पता चल जाता है क हं डया म भात तैयार हआ या नह ु ले कन तुमने एक-एक कर चेक कये हं डया सारे दाने फर भी आ त नह हमसे.... आजमाइश क कोई और तरक ब सोचो दो त शक का कोई इलाज नह हम नह ह हं डया के दाने और क चे भी नह ह हं डया म हम पके हए ु ह पूरे जतना क तुम हो दो त.....

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